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गुरुवार, जून 1

जबलपुर स्टेशन पहुँचे जय-वीरू...... : ज़हीर अंसारी

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जय और वीरू आज अचानक जबलपुर रेलवे स्टेशन पहुँच गए। दोनों को शायद राजधानी जाना था, कौन सी राजधानी की ट्रेन तत्काल मिलेगी, यह जानने के लिए वो सीधे प्लेटफ़ार्म नम्बर एक पर पहुँच गए। इनके पास कोई लगेज नहीं था, न ही साथ में कोई दो-पाया साथी। दोनों ने पहले इधर-उधर देखा फिर बेधड़क प्लेटफ़ार्म स्थित एकीकृत क्रू लॉबी में घुस गए। दोनों इतने हट्टे-कट्टे थे कि किसी की हिम्मत ही नहीं हुई उन्हें रोकने की। उलटे जो लोग लॉबी में काम कर रहे थे, उनमें कुछ डर के मारे बाहर भाग खड़े हुए।
जय और वीरू शान से अंदर गए, चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई। शायद जानना चाह रहे थी कौन सी ट्रेन राजधानी जाएगी। दोनों दो-तीन मिनिट वहीं खड़े रहे। भाषा प्रोब्लम होने की वजह से उनका किसी ने न तो अभिवादन किया, न किसी से उन्हें रिस्पांस दिया। वहाँ मौजूद कुछ कर्मचारी उनकी डील-डौल देखकर घबरा गए। ये दोनों मुस्तंडे 'खेलने दो वरना खेल बिगड़ेंगे' की तर्ज़ पर थोड़ी देर खड़े रहे, जब कोई रिस्पांस नहीं मिला तो उनमें एक ने गंदगी फैला दी।
आप सोच रहे होंगे कि यहाँ शोले फ़िल्म के जय और वीरू की बात हो रही है मगर ऐसा नहीं है। यहाँ दो हष्ट-पुस्ट बैलों की बात हो रही है। गुरुवार की रात नौ बजे दो तंदूरुस्त बैल प्लेटफ़ार्म नम्बर एक पर कहीं से घुस आए। ये किधर से आए, ये तो रहस्य है। आते ही दोनों पहले डाक आफिस में घुसने का प्रयास किया, वहाँ से हकाले गए तो बाज़ू वाली क्रू लॉबी में घुस गए। एक बैल ने अंदर खड़े-खड़े गोबर कर दिया। लगा कि उसे 'ज़ोर' से आई थी। लॉबी से ये दोनों बाहर निकले तो यात्री ऐसे तितर-बितर हुए जैसे आतंकवादी घुस आए हों। हालाँकि की बैलों की हरकतें कुछ इसी तरह की थी।
वहाँ से भगाए तो प्लेटफ़ार्म पर टहलने लगे। इसी प्लेटफ़ार्म पर मुंबई जाने वाली महानगरी आने वाली थी लिहाज़ा वहाँ मौजूद यात्रियों ने हिम्मत करके उन्हें भगाया तो ये दोनों बैल मस्त टहलते हुए सिग्नल की तरफ़ निकल गए।
बैलों की हरकतों से तो ऐसा महसूस हुआ कि जैसे इन्हें ट्रेन में बैठकर फ़ौरन दिल्ली जाना है और वहाँ जाकर पशुओं को लेकर बनाई जा रही नीति के सिलसिले में कोई ज्ञापन देना है।

सोमवार, नवंबर 3

कलेक्टर श्री रूपला ने मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की राशि कैंसर ग्रस्त मरीजों की मदद के लिये दी

रीवा जिले में कृषि उत्पादन में वृद्धि के प्रयासों में मिली जबरदस्त कामयाबी के लिए कलेक्टर शिवनारायण रूपला को आज भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड पर आयोजित मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजा गया है । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस समारोह में श्री रूपला को यह पुरस्कार प्रदान किया ।  पुरस्कार के रूप में उन्हें प्रशस्ति पत्र और पचास हजार रूपए की राशि का चेक प्रदान किया गया ।
                ज्ञात हो कि श्री रूपला ने रीवा जिले का कलेक्टर रहते हुए कृषि के क्षेत्र में कई ऐसे अनूठे प्रयोग किये थे जिनकी वजह से इस जिले के कृषि उत्पादन में महज तीन साल में साढ़े तीन गुना की वृद्धि दर्ज की गई । रीवा जिला जो खाद्यान्न की अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहा करता था वह महाराष्ट्र को भी गेहूं और चांवल की आपूर्ति करने लगा ।
                कृषि के क्षेत्र में रीवा जिले के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए श्री रूपला ने कृषि विभाग के अमले और कृषि वैज्ञानिकों को साथ लेकर अपने प्रयासों की शुरूआत वर्ष 2011-12 से की ।  उन्होंने पिछड़ेपन के कारणों का पता लगाने के लिए न केवल गांवों का सर्वे किया बल्कि खेत-खलिहानों तक पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद कायम किया और उनकी समस्यायें जानी । श्री रूपला ने किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया और अच्छी किस्म के बीजों, उन्नत कृषि यंत्रों एवं संतुलित खाद का उपयोग करने की सलाह दी ।
                श्री रूपला ने अपने प्रयासों को केवल यहां पर ही विराम नहीं दिया । बल्कि उन्होंने गांव-गांव में कृषक संगोष्ठियों एवं कृषक प्रशिक्षण के कार्यक्रमों का आयोजन किया ।  उन्होंने रीवा जिले के कृषकों को मालवा जैसे उन क्षेत्रों के भ्रमण पर भी भेजा जो कृषि की दृष्टि से उन्नत माने जाते हैं । श्री रूपला ने रीवा जिले में सिंचाई के साधनों से विकास की कार्ययोजना तैयार की और उसका क्रियान्वयन भी किया । बड़ी संख्या में किसानों के क्रेडिट कार्ड बनवाये और उन्हें शासन की नीतियों के तहत कृषि ऋण उपलब्ध कराया । मिट्टी का परीक्षण कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाये और किसानों को बीज एवं उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना सिखाया ।
श्री रूपला ने गांव-गांव में कृषकों की कार्यशाला कराई और किसानों को छिटकवा पद्धति की जगह कतार से बुआई करने, देर से नहीं समय पर बोनी करने, खेत को पड़ती नहीं रखने, गहरी जुताई करने, अंतरवर्ती फसल लेने, समय पर फसल की कटाई करने, बुआई के लिए रिज-फरो एवं एस.आर.आई. पद्धति अपनाने, मंूग उड़द की खेती खरीफ में नहीं करके जायद में करने, परंपरागत खेती की जगह खेती की वैज्ञानिक पद्धति अपनाने, जैविक खेती अपनाने, बीज उपचार करने एवं फसलों को रोग मुक्त रखने, वर्षा जल का संचय करने, नलकूप और नहरों के पानी को व्यर्थ न जाने देने, सूक्ष्म सिंचाई पद्धति को अपनाने और गेहूं एवं धान की फसल को उपार्जन केन्द्रों पर ही बेचने जैसे कई संकल्प दिलवाये ।
कलेक्टर के इन सब प्रयासों का परिणाम यह निकला कि रीवा जिले ने वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2013-14 तक खरीफ फसलों में 313 और रबी फसलों के उत्पादन में 195 फीसदी की वृद्धि दर्ज की । कीमत के रूप में देखा जाये तो इस जिले का कृषि उत्पादन जो वर्ष 2010-11 में 676 करोड़ रूपये का हुआ करता था वह 330 फीसदी बढ़कर वर्ष 2013-14 में बढ़कर 2 हजार 231 करोड़ रूपये का हो गया ।  धान की उत्पादकता में 175 फीसदी और गेहूं की उत्पादकता में 122 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई । रीवा जिले में पहली बार 2012-13 से ग्रीष्मकालीन मूंग और मक्का की खेती प्रारंभ की गई ।

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कलेक्टर श्री  रूपला ने मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की राशि  कैंसर ग्रस्त मरीजों की मदद के लिये दी 
                                                 कलेक्टर श्री शिवनारायण रूपला ने आज यहां मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के रूप में उन्हें प्राप्तपूरी राशि कैंसर पीड़ितों के इलाज और देख-रेख के पुनीत कार्य के लिए समर्पित की। वे अपनी धर्मपत्नी एवं बेटी के साथ कैंसर पीड़ितों के इलाज के लिए ख्यात विराट हास्पिस पहुंचे थे । श्री रूपला ने ब्राहृर्षि मिशनसमिति द्वारा रामपुर तिराहा के समीप दीक्षित इन्क्लेव में संचालित विराट हास्पिस के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अखिलेश गुमाश्ता को 27 हजार 727 रूपए की पुरस्कार राशि का चेक प्रदान किया। उल्लेखनीय है किगत 1 नवम्बर को राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने कलेक्टर श्री रूपला को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया था ।


साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी द्वारा स्थापित इस चिकित्सा संस्थान में मुख्यत: ऐसे कैंसर पीड़ितों की चिकित्सा और देख-रेख की जाती है जो हर दृष्टि से निराश और निरूपाय हो जाते हैं। यहां मरीजों को भोजन  एवं रहवास की नि:शुल्क सुविधा मुहैया कराई जाती है । यही नहीं संस्थान द्वारा मरीजों को रेडियोथेरेपी एवं अन्य इलाज के लिए संस्थान के खर्च पर नाम-चीन चिकित्सालयों को भी भेजा जाता है । आठ बिस्तरों से आरंभ हुए इस संस्थान में बीते डेढ़ वर्षों में बिस्तरों की संख्या दोगुनी हो गई है । जाहिर है गंभीर रूप से कैंसर ग्रस्त मरीजों की मदद का जज्बा दूसरों के लिए भी प्रेरक बनता है । निश्चय ही कलेक्टर श्री रूपला द्वारा अपने जन्मदिन पर कैंसर पीड़ितों को राशि समर्पित करना समाज के अन्य संवेदनशील लोगों को भी प्रेरित करेगा ।

रविवार, मई 5

त्रिपुरी के कलचुरि : ललित शर्मा

त्रिपुर सुंदरी तेवर

सहोदर प्रदेश छत्तीसगढ़ के मशहूर घुमक्कड़ ब्लागर श्री ललित शर्मा ( जो पुरातात्विक विषयों पर ब्लाग लिखतें है) का संक्षिप्त ट्रेवलाग  बिना कांट छांट के प्रस्तुत है -जो उनके ब्लाग ललित शर्मा . काम  से लिया गया है-  गिरीश बिल्लोरे मुकुल   )
          आज का दिन भी पूरा ही था हमारे पास। रात 9 बजे रायपुर के लिए मेरी ट्रेन थी। मोहर्रम के दौरान हुए हुड़दंग के कारण कुछ थाना क्षेत्रों में कर्फ़्यू लगा दिया गया था। आज कहीं जाने का मन नहीं था। गिरीश दादा को फ़ोन लगाए तो पता चला कि वे मोर  डूबलिया कार्यक्रम में डूबे हुए हैं। ना नुकर करते 11 बज गए। आखिर त्रिपुर सुंदरी दर्शन के लिए हम निकल पड़े। शर्मा जी नेविगेटर और हम ड्रायवर। दोनो ही एक जैसे थे, रास्ता पूछते पाछते भेड़ाघाट रोड़ पकड़ लिए। त्रिपुर सुंदरी मंदिर से पहले तेवर गाँव आता है। यही गाँव जबलपुर के ब्लाग-लेखक श्री विजय तिवारी जी का जन्म स्थान एवं पुरखौती है। हमने त्रिपुर सुंदरी देवी के दर्शन किए और कुछ चित्र भी लिए। मंदिर के पुजारी दुबे जी ने बढिया स्वागत किया। 

तेवर का तालाब
ससम्मान देवी दर्शन के पश्चात हम तेवर गाँव पहुंचे। राजा हमे सड़क पर खड़ा तैयार मिला। तेवर गाँव में प्रवेश करते ही विशाल तालाब दिखाई देता है। कहते हैं कि यह तालाब 85 एकड़ में है। अभी इसमें सिंघाड़े की खेती हो रही हैं। तेवर पुरा सामग्री से भरपूर गांव है। जहाँ देखो वहीं मूर्तियाँ बिखरी पड़ी हैं। कोई माई बाप नहीं है। खंडित प्रतिमाए तो सैकड़ों की संख्या में होगी। इससे मुझे लगा कि यह गाँव कोई प्राचीन नगर रहा होगा। तालाब के किनारे पर शिवालय दिखाई दे रहा था और एक चबुतरे पर शिवलिंग के साथ कुछ भग्न मूर्तियाँ भी रखी हुई थी। ग्राम के मध्य में एक स्थान पर खुले में उमा महेश्वर की प्रतिमा रखी हुई है, यहाँ कुछ लोग पूजा कर रहे थे। ढोल बाजे गाजे के साथ कुछ उत्सव जैसा ही दिखाई दिया।

तेवर की बावड़ी
इससे आगे चलने पर एक विशाल बावड़ी दिखाई देती हैं। इसके किनारे पर एक मंदिर बना हुआ है, इस मंदिर में एक शानदार पट्ट रखा हुआ है जिसमें बहुत सारी मूर्तियाँ बनी हुई हैं। इस मंदिर के ईर्द गिर्द सैकड़ों मूर्तियाँ लावारिस पड़ी हुई हैं जिनका कोई माई बाप नहीं है। इसके बाद राजा हमें एक घर में मूर्तियाँ दिखाने ले जाता है, वहां पर सिंह व्याल की लगभग 5 फ़िट ऊंची प्रतिमा है, जिसे रंग रोगन लगा दिया गया है और उसके साथ ही दर्पण में प्रतिबिंब देखते हुए श्रृंगाररत अप्सरा की सुंदर प्रतिमा भी दिखाई थी। पास ही चौराहे पर उमामहेश्वर की एक बड़ी भग्न प्रतिमा रखी हुई है। राजा यहाँ से हमें झरना दिखाने ले चलता है। 

झरने में गड्ढे
4-5 किलो मीटर कच्चे रास्ते पर जाने के बाद एक स्थान पर झरना दिखाई देता है। इस स्थान के आस-पास बड़े टीले हैं और टीलों के बीच के मैदान में गाँव के बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। उम्मीद है कि इन टीलों में भी कोई न कोई मंदिर या भवन के अवशेष अवश्य ही दबे पड़े होगें। झरने का जल निर्मल है, हमने यहीं पर बैठ कर भोजन किया और झरने के निर्मल जल पीया। झरने की तलहटी में लगभग 1 फ़ीट त्रिज्या के कई गड्ढे बने हुए हैं और यहीं पर शिवलिंग भी विराजमान है। साथ ही एक दाढी वाले बाबा की मूर्ति भी रखी हुई है जिसे विश्वकर्मा जी बताया जा रहा है। अवश्य ही यह किसी राजपुरुष की प्रतिमा होगी। विजय तिवारी जी ने बताया था कि त्रिपुर सुंदरी मंदिर के रास्ते में खाई में महल के अवशेष भी दिखाई देते हैं। 
विशाल मंदिर का मंडप
हम महल के अवशेष देखने के लिए खाई पर पहुंचे, वहाँ सब्जी बोने वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। कहते हैं कि सड़क निर्माण के दौरान यहाँ से बहुत सारी पुरासामग्री निकली है और मिट्टी के कटाव में बहुत सारे मृदा भांड के अवशेष हमें भी दिखाई दिए। झाड़ झंखाड़ के बीच हम खाई में उतरे और मंडप तक पहुंचे। यह किसी विशाल मंदिर का मंडप है। गर्भगृह के स्थान पर एक गड्ढा बना हुआ है, खजाने के खोजियों ने यहाँ पर भी अपना कमाल दिखा रखा है। इस गड्ढे को लोग सुरंग कहते हैं। बताया जाता है यहाँ से रास्ता महल तक जाता था। खाई में सैकड़ों की संख्या में बिल दिखाई दे रहे थे ऐसी अवस्था में अधिक देर हमने ठहरना मुनासिब न समझा। क्योंकि यह स्थान सांपों के लिए मुफ़ीद स्थान है। 
अप्सरा
अब तेवर के ऐतिहासिक महत्व की चर्चा करते हैं, पश्चिम दिशा में भेड़ाघाट रोड पर स्थित वर्तमान तेवर ही कल्चुरियों की राजधानी त्रिपुरी है जो कि शिशुपाल चेदि राज्य का वैभवशाली नगर था। इसी त्रिपुरी के त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध करने के कारण ही भगवान शिव का नाम ‘त्रिपुरारि‘ पड़ा। यहाँ स्थित देवालयों एवं भग्नावशेषों से ही ज्ञात होता है कि कभी यह नगर वैभवशाली रहा होगा। तेवर की प्राचीनता हमें ईसा की पहली शताब्दी तक ले जाती है। तेवर जिसे हम त्रिपुरी कहते हैं यह चेदी एवं त्रिपुरी कलचुरियों की राजधानी रहा है।  गांगेय पुत्र कल्चुरी नरेश कर्णदेव एक प्रतापी शासक हुए,जिन्हें ‘इण्डियन नेपोलियन‘ कहा गया है। उनका साम्राज्य भारत के वृहद क्षेत्र में फैला हुआ था। सम्राट के रूप में दूसरी बार उनका राज्याभिषेक होने पर उनका कल्चुरी संवत प्रारंभ हुआ। कहा जाता है कि शताधिक राजा उनके शासनांतर्गत थे।
भग्नावशेषों का निरीक्षण करते हुए
जबलपुर के पास ही गढ़ा ग्राम पुरातन "गढ़ा मण्डलराज्य' के अवशेषों से पूर्ण है। गढ़ा-मण्डला गौड़ों का राज्य था गौड़ राजा कलचुरियों के बाद हुए हैं। जबलपुर के पास की कलचुरि वास्तुकला का विस्तृत वर्णन अलेक्ज़ेन्डर कनिंहाम ने अपनी रिपोर्ट (जिल्द ७) में किया है। प्रसिद्ध अन्वेषक राखालदास बैनर्जी ने भी  इस विषय पर एक अत्यन्तअंवेष्णापूर्ण ग्रंथ लिखा है। भेड़घाट और नंदचंद आदि गाँवो में भी अनेक कलापूर्ण स्मारक हैं। भेड़ाघाट में प्रसिद्द "चौंसठ योगिनी' का मंदिर। इसका आकार गोल है। इसमे ८१ मूर्तियों के रखने के लिए खंड बने हैं। यह १०वीं शताब्दी में बना है। मन्दिर के भीतर बीच में अल्हण मन्दिर है।
हमारा त्रिपुरी दर्शन पूर्णता की ओर था। राजा को गाँव में छोड़ कर हम जबलपुर वापस आ गए, मुख्यमार्ग में कर्फ़्यू लगे होने के कारण कई घुमावदार रास्तों से गुजरते हुए हम सिविल लाईन पहुंचे। यहाँ से स्टेशन थोड़ी ही दूर है, 9 बजे हमारी ट्रेन का टाईम था और अमरकंटक एक्सप्रेस हमारी रायपुर वापसी थी। नियत समय पर ट्रेन पहुंच गई और जबलपुर की यादें समेटे हुए चल पड़ा अपने गंतव्य की ओर नर्मदे हर नर्मदे हर का जयघोष करते हुए।

बुधवार, अप्रैल 18

कलेक्टर गुलशन बामरा ने बिना शर्त माफी मांगी



जबलपुर, 18 अप्रैल, 2012
          पिछले दो दिन से समाचार पत्रों में 16 अप्रैल 2012 को गेहूँ खरीदी के संबंध में ली गई मीटिंग तथा उसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को दिये गये वक्तव्य के संबंध में कलेक्टर गुलशन बामरा ने अपने जिले के किसानों से बिना शर्त माफी मांगी है।
          इस संबंध में कलेक्टर ने कहा है कि मेरी याददाश्त और समझ के अनुसार मेरे द्वारा जिले के किसानों के संबंध में किसी प्रकार के अपशब्द नहीं कहे गये हैं। उन्होंने कहा है कि कतिपय गेहूँ खरीदी केन्द्रों में गेहूँ की गुणवत्ता ठीक नहीं होने की सूचना मिलने के उपरांत इस संबंध में मेरे द्वारा किसानों से अपील की गई थी किसमर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेहूँ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से आंगनवाड़ियों में बच्चोंगर्भवती माताओंस्कूलों में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम तथा पीला एवं नीला राशन कार्ड के माध्यम से गरीबों कोसार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित किया जाता है। मेरे द्वारा यह भी कहा गया था कि कतिपय किसान  बिना गुणवत्ता का गेहूँ खरीदी केन्द्र पर लाकर किसानों की अन्नदाता की छबि खराब कर रहे हैं तथाआवश्यकता पड़ने पर ऐसे किसानों पर खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए।
          कलेक्टर ने कहा है मैं यह अनुरोध करना चाहूँगा कि मेरी मंशा किसानों के खिलाफ कार्यवाही करने की नहीं बल्कि गुणवत्ता युक्त गेहूँ केन्द्र पर लाने के संबंध में किसानों से अपील की थी। मेरे ऐसे वक्तव्य से किसानोंके आत्म सम्मान को ठेस लगीइसका मुझे खेद है।
          कलेक्टर ने जिले के किसानों की भावनाओंजनप्रतिनिधियों की भावनाओंसाथी अधिकारियों एवंकर्मचारियों की राय तथा मीडिया सार्थियों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए मैं अपने वक्तव्य के लिये बिना शर्तमाफी मांगने के लिए प्रेरित हुआ हूँ  मेरे द्वारा प्रयोग किये गये शब्दों से संबंधितों को किसी प्रकार से ठेस लग सकती हैइस संबंध में मुझे संवेदनशील बनाने के लिए मैं समस्त किसानों , जनप्रतिनिधियोंसहयोगी अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा मीडिया साथियों का आभार मानता हूँ।

शुक्रवार, फ़रवरी 24

जितनी ज़ल्द हो सके मन से कुण्ठा को विदाई दिलाना ज़रूरी है.


                           उदास आंखों में सपनों ने जगह बना ही ली . अक्सर हम सोचा करतें हैं कि हम सबसे ज़्यादा दुखियारे अकिंचन हैं.हमारी आदत है ऊंचाईंयों तक निगाह करने की. और फ़िर खुद को देखने की. अब बताईये परबत देख कर आप खुद को देखेंते हैं तब  तो सामान्य सी बात है कि खुद को नन्हा महसूस करेंगे ही. बस यहीं कुंठाएं जन्म ले लेतीं हैं. हम खुद को असहज पाते हैं.    

दस बरस का था तब मुझे लगा कि मैं क्रिकेट खेल सकता हूं और फ़िर कोशिश की बैसाखियों के सहारे दो रन बनाए भी. दूसरी ही बाल पर क्लीन बोल्ड. बोल्ड होने से अधिक पीढा थी खेल न पाने की. बाल मन अवसाद से सराबोर हुआ . रोया भी ....खूब था तब
      रेल स्टेशन के क़रीब रेल्वे  क्वार्टर में  अक्सर दुख:द खबरें मिला करतीं थीं. उस दिन स्कूल से लौटते वक़्त देखता हूं कि एक इंसान जाने किस भ्रम के वशीभूत हुआ रेल पटरी पार करने के बाद वापस लौटा और यकायक रेलगाड़ी की चपेट में आ गया.. मेरी आंखों के सामने घटा ये सब ये क्या .. उफ़्फ़ दौनों टांगें .. खुद से खूब सवाल करता रहा -"बताओ, अब वो जी भी गया तो क्या सहजता से चल सकेगा..?     
  अर्र अब उस बेचारे के तो दौनों पांव..?" 
   मुझसे ज़्यादा बुरी दशा में है वो.. उसके तो दौनों पैर.. ही न होंगे.. अब 
   जी हां उसी दिन से मन का अकुलाहट से रिश्ता ही टूट गया. 
  कहानी का इशारा है कि जितनी ज़ल्द हो सके मन से कुण्ठा को विदाई दिलाना ज़रूरी है. 
       पर वयस्क होने पर कुण्ठाएं बेलगाम हो जातीं है. अक्सर बच्चों में बगावती तेवर आपने देखे होंगे.ये ही बच्चे बड़े होकर एक बेलगाम ज़िंदगी को जीते हैं. सही वक़्त है बचपन जब आप बच्चों को अभावों कमियों पराजयों से मुक़ाबला करना सिखा सकते हैं...



   ज्ञान मत बांटिये भाषण मत दीजिये दिखाइये उनको अभाव ग्रस्त जीवनों की परिस्थितियाँ . अक्सर हम ग़रीब, बेसहारा यतीमों को "अनाथ" कह कर दया भाव से देखते हैं. मेरे एक मित्र ने मित्रों का नज़रिया ही बदल दिया. जी हाँ वही दीपेंद्र बिसेन जी ने.  अनाथ नहीं मानते ऐसे बे सहारा बच्चों को .
तस्वीरें बता रहीं हैं बाल-गृह के बच्चे अब सुनहरे सपने देख रहें हैं. खेल रहें हैं पढ़ रहे हैं.. योग सीख रहे हैं.. 
 तभी तो मैंने भी तय किया है इन बच्चों  के साथ सपरिवार एक दिन अवश्य बिताउंगा ..  
मेरे बच्चे समझेंगे अभाव से साहस कैसे हासिल होता है. 
जानेंगें ये भी कि ये वो बच्चे हैं जिनको जिद्द शब्द के मायने नहीं मालूम.. 

इन बच्चों की आंखों  में सपने आने लगे हैं.. सपने पूरे भी होते जा रहे है, वे भी पार्क में जाते हैं..
  
                                                                                अबोले जंगल में सरसराते पत्तों  की आवाज  सुनते  ये बच्चे कितने उमंग से निकल पड़े हैं जीवन यात्रा पर ..............!! 
जाने कौन इनमें से किसी करिश्मे को आपके सामने ले आए 



जो भी हो एक दिन इनके साथ बिताने से महसूस होता है कि "जीवन के मायने क्या हैं..?"

अंत में दीपेंद्र भाई को एक बार फिर आभार तस्वीरें उपलब्ध कराने के लिए.
तो मित्रो आप आ रहें हैं मिलने..... इन बच्चों से 

बुधवार, फ़रवरी 1

रेड रिबन एक्सप्रेस से प्राप्त ज्ञान लोगों में जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा-पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई


        प्रदेश के पशुपालन एवं मछलीपालन तथा पिछड़ावर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अजय विश्नोई नेगांव के विकास को सरकार की पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कीसरकार प्रदेश की पहली ऐसी सरकार है जिसने विकास को सिर्फ सड़कबिजलीपानी तक सीमित नहीं रखा हैबल्कि आम आदमी के हित में अभिनव योजनायें शुरू कर इसे घर-घर तक पहुंचाया है 
          श्री विश्नोई आज मझौली विकासखण्ड के ग्राम इंद्रानाकापानेगईअनघौरागठौराहिनौतापोलाढोडा,नंदग्रामखबरा और ग्राम हटौली में पंच-परमेश्वर योजना के तहत करीब पौन करोड़ रूपये लागत की सीमेंटकांक्रीट सड़कों के भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे  पशुपालन मंत्री ने इस मौके पर ग्राम इन्द्राना सेकटंगी-मझौली-पाटन क्षेत्र में पन्द्रह दिन तक चलने वाली विकास यात्रा का शुभारंभ भी किया 
          पशुपालन मंत्री ने अपने उद्बोधन में उनके विधायक रहते पिछले 13 वर्षों में मझौली में हुए विकास कार्योंका उल्लेख किया   उन्होंने कहा कि आज इस क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तन दिखाई दे रहा है  यहां गांवों कोमुख्य सड़क मार्ग से जोड़ा गया हैग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधायें पहुंचाई गई हैहर जरूरतमंद तक सरकारीयोजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है और गांव-गांव में शाला भवन बनवाये गये हैं   श्री विश्नोई ने कहा किमझौली क्षेत्र की इस विकास यात्रा को थमने नहीं देंगे   यह यात्रा अनवरत जारी रहेगीबल्कि विकास की गतिअब और तेज होगी 
          पशुपालन मंत्री ने प्रदेश में भाजपा के शासन काल में पिछले आठ वर्षों के दौरान गांवों में हुए विकासकार्यों का भी जिक्र भी किया   उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कीसरकार के पास धन की कमी नहीं है   इन आठ वर्षों में प्रदेश की सरकार ने गांवों में सड़कों का जाल बिछा दियाहैबिजली का उत्पादन दुगना कर गांवों को 12 घंटे बिजली दी जा रही है  फीडर सेपरेशन का काम पूरा होने केबाद वर्ष 2013 तक गांवों को 24 घंटे और खेतों को आठ घंटे बिजली यह सरकार पहुंचायेगी 
          पशुपालन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने विकास की परिभाषा को केवलसड़कबिजलीपानी तक ही सीमित नहीं किया है   बल्कि अंत्योदय उपचार योजनामजदूर सुरक्षा योजना,जननी सुरक्षा योजनाछात्र-छात्राओं को साइकिल और गणवेश देने की योजनानि:शुल्क पाठ¬ पुस्तक देने कीयोजनाविवाह योग्य बेटियों के लिए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी आम आदमी को सीधे फायदा पहुंचानेवाली योजनायें शुरू कर विकास की परिभाषा को व्यापकता दी है 
                                                                                       श्री विश्नोई ने कहा कि इन सब योजनाओं के बावजूद सरकार ने सबसे ज्यादा सुविधायें किसी एक वर्ग कोदी है तो वो प्रदेश का किसान है  उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान मजबूत हो   सरकार का माननाहै कि किसान मजबूत होगा तो प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी   श्री विश्नोई ने बताया किकिसानों को एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है   प्रदेश कीसरकार किसानों को उनकी उपज की अधिक कीमत दिलाने के लिए गेहूं और धान के समर्थन मूल्य पर बोनसभी दे रही है   सरकार ने पिछले वर्ष पड़े पाला से पीड़ित किसानों को मदद देने के लिए नियमों में फेरबदल करकेवल अपने संसाधनों से 1400 करोड़ रूपये की राहत राशि वितरित की है 
          श्री विश्नोई ने भूमिपूजन समारोहों में राज्य शासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई पंच-परमेश्वर योजना काजिक्र भी किया  उन्होंने कहा कि यह योजना गांवों की तस्वीर बदल कर रख देगी  पशुपालन मंत्री ने कहा किइस योजना के तहत ग्राम पंचायतों को आबादी के मान से 5 लाख से 15 लाख रूपये की एकमुश्त राशिअधोसंरचना विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए दी गई है 
          पशुपालन मंत्री ने कहा कि पंच-परमेश्वर योजना लागू होने से अब गांवों की अंदरूनी सड़कों और पक्कीनालियों के निर्माण के लिए सांसद और विधायक निधि पर निर्भरता खत्म हो जायेगी   ग्राम पंचायतें खुदयोजना के तहत मिली राशि से गांव के भीतर सीमेंट कांक्रीट सड़कें बना सकेगी  श्री विश्नोई ने सरपंचों से कहाकि यदि वो योजना के तहत मिली पहली किश्त की राशि को दो माह के भीतर खर्च कर लेते हैं तो अगले वित्तीयवर्ष की शुरूआत में ही उन्हें दूसरी किश्त दे दी जायेगी   उन्होंने सरपंचों से पंच-परमेश्वर योजना के तहत सड़कोंऔर पक्की नालियों के निर्माण में गुणवत्ता की ओर खास ध्यान देने का आग्रह किया   उन्होंने कहा कि यदिगुणवत्ता ठीक नहीं रखी तो फिर  सरपंच बच पायेंगे  सचिव  गड़बड़ी पाये जाने पर सब इंजीनियर औरजनपद के सी..पर भी कार्रवाई होगी 
                           राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन द्वारा एच.आई.व्हीएड्स के विरूद्ध प्रचार-प्रसार के राष्ट्रव्यापी अभियान रेडरिबन एक्सप्रेस (रेल चल प्रदर्शनीके जबलपुर आगमन पर आज प्रात: 10 बजे मदन महल रेल्वे स्टेशन परशुभारंभ समारोह प्रदेश के पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर प्रभात साहू कीअध्यक्षता में सम्पन्न हुआ   इस अवसर पर नागरिकअधिकारी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे 
          इस अवसर पर आयोजित गरिमामय समारोह को संबोधित करते हुए पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई नेराष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन को जागरूकता के इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया   उन्होंने कहा यह एकखतरनाक बीमारी है   इसके कारण लक्षण एवं बचाव की जानकारी आमजनों को होनी चाहिए  श्री विश्नोई नेकहा यह रेड रिबन एक्सप्रेस जन जागरूकता के लिए अभिनव प्रयास है    आमजन एड्स के प्रति अपनीसमझ बढ़ाये   श्री विश्नोई ने यहां उपस्थित जन समूह से आव्हान किया जो साहित्य मिल रहा है तथा यहां जोबातें बताई जा रही है उसे जाने समझें गहन अध्ययन मनन करें और लोगों को भी जागरूक बनायें 
          कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महापौर प्रभात साहू ने कहा एड्स के प्रति आम लोगों में जागरूकता लानेकी जरूरत है   उन्होंने कहा रेड रिबन एक्सप्रेस लोगों में एड्स और टी.बीआदि के प्रति जागृति लाने में सफलहोगी शुभकामनाएं भी दी   इसी क्रम में रेड रिबन एक्सप्रेस के सी..ने कहा यह ट्रेन एड्स की जनजागरूकता के लिए देश के 100 से अधिक स्टेशनों पर जायेगी  इसमें मध्यप्रदेश के कटनीजबलपुर भी शामिल है   जबलपुर में भी अपार जन समूह को देखकर कहा यहां भी भारी संख्या में लोग मौजूद हैं लगता हैदेश में प्रथम पंक्ति में जबलपुर का नाम पुनदर्ज हो जायेगा 
रेल प्रदर्शनी का शुभारंभ:
          इस अवसर पर पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई द्वारा रेल प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया   अतिथियों द्वाराइसका अवलोकन भी किया गया 
          रेल कोच में प्रदर्शनी में एच.आई.व्हीऔर एड्स के जैव चिकित्सकीय पहलुओं को टचस्क्रीन के माध्यमसे प्रदर्शित किया गया है 
          शैक्षणिक सामग्री का प्रदर्शन इसमें एच.आई.व्हीएड्स और उससे जुड़ी हुई देखभाल सहयोग औरउपचार संबंधी सेवाएं शामिल हैं  कोच में स्वाईन फ्लूटी.बीऔर प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं सेसंबंधित जानकारी का प्रदर्शन किया गया है 
          एच.आई.व्हीएवं एड्स अन्य संक्रामक बीमारियों एवं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संबंध में आमनागरिकों के मध्य जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाईजेशन (नाकोनईदिल्लीके द्वारा चलाई जा रही रेड रिबन एक्सप्रेस का जबलपुर में 1 फरवरी 2012 को आगमन हुआ  यह रेड रिबनएक्सप्रेस भारत सरकार के द्वारा चलाई जा रही एक टेन है जो नईदिल्ली से 12 जनवरी से चलकर राजस्थानहोते हुए मध्य प्रदेश के सागरकटंगी खुर्दकटनी के बाद अब जबलपुर में है   मध्यप्रदेश के बाद यह ट्रेन अन्यप्रदेशों में भी जाएगी तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष का भ्रमण करेगी   रेड रिबन एक्सप्रेस 2 फरवरी 2012 तक मदनमहल रेल्वे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 3 पर खड़ी रहेगी तथा आम जनता के द्वारा इसकी प्रदर्शनी का 2 फरवरी2012 को प्रात: 10 बजे से सायं 6 बजे तक अवलोकन किया जा सकता है   रेड रिबन एक्सप्रेस के माध्यम सेआम नागरिकों की सामान्य स्वास्थ्य जांच एवं एच.आई.व्हीपरीक्षण का कार्य भी किया जाएगा